सर्दियों में स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ जाता है — और इससे कैसे बचें
भारत में सर्दियों को अक्सर हल्का और आरामदायक मौसम माना जाता है। लेकिन हर साल नवंबर से फरवरी के बीच देश के अस्पतालों में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जाती है। यह कोई संयोग नहीं है। ठंड के मौसम में शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलाव, जीवनशैली में परिवर्तन और पुरानी बीमारियों का सही नियंत्रण न होना — ये सभी मिलकर स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देते हैं।
इस बदलाव को समझना और समय रहते सावधानी बरतना कई ज़िंदगियाँ बचा सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक क्या होता है?
ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या अचानक कम हो जाती है, जिससे ब्रेन सेल्स को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं:
- इस्केमिक स्ट्रोक — जब खून की नली में थक्का जम जाता है (भारत में लगभग 80% स्ट्रोक इसी प्रकार के होते हैं)।
- हेमरेजिक स्ट्रोक — जब किसी रक्त वाहिका के फटने से मस्तिष्क में खून बहने लगता है।
भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक अपंगता का एक प्रमुख कारण है, विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग से ग्रस्त लोगों में।
सर्दियों में स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ता है?
सर्दियों में कई कारक एक साथ काम करते हैं:
- ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है: ठंड में रक्त नलिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ता है — जो स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है।
- डिहाइड्रेशन बढ़ता है: लोग सर्दियों में कम पानी पीते हैं, जिससे खून गाढ़ा हो जाता है और थक्का बनने की संभावना बढ़ती है।
- शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है: लोग कम चलते-फिरते हैं, जिससे वजन, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
- पुरानी बीमारियों का सही नियंत्रण नहीं होता: दवाइयाँ छोड़ना या जांच टालना ब्लड प्रेशर और शुगर को अस्थिर कर देता है।
- मौसमी संक्रमण बढ़ते हैं: फ्लू और सांस की बीमारियाँ शरीर में सूजन और क्लॉटिंग का खतरा बढ़ाती हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
- उच्च रक्तचाप या मधुमेह वाले लोग
- धूम्रपान या तंबाकू सेवन करने वाले
- हृदय रोग या अनियमित धड़कन वाले मरीज
- 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग
- जिन्हें पहले स्ट्रोक या TIA हो चुका हो
- अत्यधिक तनाव या खराब नींद वाले लोग
स्ट्रोक के लक्षण पहचानें — FAST नियम याद रखें
- F — चेहरा टेढ़ा होना
- A — हाथ या पैर में कमजोरी
- S — बोलने में परेशानी
- T — तुरंत अस्पताल पहुँचें
इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो देर न करें।
सर्दियों में स्ट्रोक से कैसे बचें?
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करें
- दवाइयाँ बिना छोड़े नियमित लें
- सुबह और रात में खुद को गर्म रखें
- पर्याप्त पानी पीते रहें
- कम नमक और घर का बना खाना खाएँ
- जरूरत हो तो घर के अंदर व्यायाम करें
- डॉक्टर की सलाह से फ्लू वैक्सीन लें
- तंबाकू छोड़ें और शराब सीमित करें
निष्कर्ष
भारत की सर्दियाँ भले ही हल्की लगें, लेकिन शरीर पर उनका प्रभाव गंभीर हो सकता है — खासकर उन लोगों में जिन्हें जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ हैं। जागरूकता, नियमित इलाज और छोटी-छोटी सावधानियाँ स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
सर्दियों में अपने दिमाग की सेहत का विशेष ध्यान रखें — क्योंकि यही समय सबसे ज्यादा जोखिम वाला होता है।
